हंसी

कवि मन मेरा हंसी खिलखिला कर हंस रहा है वो बच्चा क्यों क्या छेड़ा किसी ने व्यंग प्रसंगया उड़ा रहा है उपहास किसी का या दिखा किसी का नग्न अंग या तबाह हुआ घर किसी का या हुआ किसी का स्वप्न भंगया गिरवी रह गयी किसी की... [पूरी पोस्ट]
writer devendra goswami
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[28 Mar 2010 04:59 AM]

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