इसलिये मुझे फक्र है कि मै दूसरी औरत हूँ ।

नारी का कविता ब्लॉग नहीं सौपा मैने अपना शरीर उसेइसलियेकि उसने मेरे साथ सात फेरे लियेकि उसने मुझे सामाजिक सुरक्षा दीकि उसने मेरे साथ घर बसायाकि उसने मुझे माँ बनायासौपा मैने अपना शरीर उसेइस लियेक्योंकि "उस समय" उसे जरुरत थीमेरे शरीर की , मेरे प्यार , दुलार कीऔर उसके बदले नहीं... [पूरी पोस्ट]
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[28 Mar 2010 05:10 AM]

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