कुछ कहना है मुझे.....

Meri Kavitayein देखते-देखते वक्त गुजर गया, आखिर जाने के दिन आ गए, एक –एक करके बना था जो कारवां, उससे बिछड़ने के दिन आ गए. आज सुबह –सुबह मन में, एक ख्याल आया, जो सामान इकट्ठे किये हैं मैंने, इन गुजरे सालों में, क्यों न उनको समेटता चलूँ, जाना तो अवश्यम्भावी है, क्यों न मन... [पूरी पोस्ट]
writer Navnit Nirav
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[28 Mar 2010 02:51 AM]

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