इस कदर नाकामियोंसे प्यार था
इस कदर नाकामियोंसे प्यार था ज़िंदगी की दौडसे इन्क़ार था है पुराना बाढ आने का चलन मेरी गलती है की मैं मँज़धार था भूक़ से बेहाल होकर मर गया लोग कहते हैं कोई खुद्दार था फूल तू, गुलशन गली तेरी मगर लौटकर देखा, जिगरमें खार...
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मिलिंद / Milind
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[28 Mar 2010 02:24 AM]



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