सुमन के भीतर आग है

मनोरमा हार जीत के बीच में जीवन एक संगीत।मिलन जहाँ मनमीत से हार बने तब जीत।।डोर बढ़े जब प्रीत की बनते हैं तब मीत।वही मीत जब संग हो जीवन बने अजीत।।रोज परिन्दों की तरह सपने भरे उड़ान।यदि सपन जिन्दा रहे लौटेगी मुस्कान।।रौशन सूरज चाँद से सबका घर संसार।पानी भी सबके... [पूरी पोस्ट]
writer श्यामल सुमन

कविता

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[28 Mar 2010 02:03 AM]

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