अहसास

रचना रवीन्द्र अहसासआशुतोष ने फिर उषा का घूँघट उठाया है.लजा के उसने भीचेहरा तो दिखया है.सुहागन हो गयीं दिशाएं सारीसिंदूर यूँ सजाया है.परओस की बूंदों का आंचल दूब के सर से भी तो तूने ही हटाया है, क्या बात है दिवाकर कोई... [पूरी पोस्ट]
writer रचना दीक्षित

उषा

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[28 Mar 2010 00:54 AM]

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