भूखे-नंगे टूटे-खस्ते कितने खुश हैं

हिन्द-युग्म रेंग-रेंग कर चलते रस्ते कितने खुश हैं भूखे-नंगे टूटे-खस्ते कितने खुश हैं हमने इनका बचपन छीन लिया है इनसे बच्चों के कन्धों पर बस्ते कितने खुश हैं शाम हुई तो घर लौटेंगे इनमें कितने सुबह-सुबह कर रहे नमस्ते कितने खुश हैं अपने चेहरे की कालिख का किसे पता हैइक... [पूरी पोस्ट]
writer नियंत्रक । Admin

ravindra sharma ravi

views
8
upvote
0
downvote
0
rating
0
comments
1
[28 Mar 2010 00:36 AM]

Free Vedic Astrology From Astrobix