छत्तीसगढ़ी लोक कला के धुरी 'नाचा'

गुरतुर गोठ 'जुन्ना समय अउ अब के नाचा म अब्बड़ फरक होगे हे। जुन्ना नाचा कलाकार मन रुपिया-पइसा के जगह मान सम्मान बर नाचयं गावयं। गरीबी लाचारी के पीरा भुलाके कला साधना म लगे राहयं, कला के संग जिययं अऊ मरयं। आज काल में नाचा म दिखावा जादा होथे कला साधना कमतियागे। फिलिम... [पूरी पोस्ट]
writer संजीव तिवारी .. Sanjeeva Tiwari

अनिल जांगडे

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[27 Mar 2010 23:37 PM]

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