फेसबुक और ऑरकुट के दीवानों, ज़रा इधर भी नज़र डालो
[पुराने पन्नों से] साथियों .....मास्टरों और उधार का चोली दमन का साथ है अतः आशा है कि आप लोग मुझे साहिर साहब की इस रचना को उधार लेकर, इसका दुरुपयोग करने के लिए माफी प्रदान करेंगे .... फेसबुक तेरे लिए एक टाइम पास ही सही तुझको ऑरकुट के रंगबिरंगे चेहरों से...
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शेफाली पाण्डे
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[27 Mar 2010 23:20 PM]



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