खुली खुली खिड़की सी दीदी
खुली खुली खिड़की तुम हमकोअच्छी बहुत बहुत लगती होहमको तो तुम प्यारी प्यारीबिलकुल दीदी सी लगती हो।जैसे बिजली के जाने परदीदी हमको पंखा झलतीतुम भी खिड़की हवा भेजकरवैसे ही तो पंखा झलती। जब हम होते कुछ उदास तोहमको नींद नहीं है आतीतो कहानियों के मेले...
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हेमंत कुमार ♠ Hemant Kumar
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[27 Mar 2010 21:55 PM]



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