परंपराओं वाले बबुआ
कई बार अपने या दूसरों के ब्लागस् पर अपनी या दूसरों की कुछ टिप्पणियां ऐसी लगती हैं कि मन होता है इन्हें ज़्यादा महत्व देकर ज़्यादा लोगों तक पहुंचाना चाहिए। ‘छोटा कमरा बड़ी खिड़कियां’ ऐसी ही टिप्पणियों का मंच बन रहा है। इस बार संवादघर की एक पोस्ट ‘मर्दों...
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sanjaygrover
व्यंग्य
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[27 Mar 2010 12:12 PM]



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