संजय कुंदन ने पिता की दुविधा बतलाई (अविनाश वाचस्‍पति)

पिताजी दुविधा ये सबकी हैपर नहीं ये अबकी हैजानते हैं सब कबकी हैसंबंध ही ऐसा हैसंबंध कोई भी होसावधानी जरूरी हैसंजय जी कुंदन हैंकहानी में कविता मेंव्‍यंग्‍य में जाहिर हैंलिखने में शब्‍दों काअहसासों का, भावों का अच्‍छा उदाहरण हैं।दैनिक नवभारत टाइम्‍स में 27 मार्च... [पूरी पोस्ट]
writer अविनाश वाचस्पति
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[27 Mar 2010 11:31 AM]

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