"ओस की बूँदें"

aapkayogeshsharma सूरज की आहट से, जाग के मदहोशी में,अलसाती ओस ने, फूल से सरगोशी में, बोला "दोस्त विदा, बस मुझको जाना है, मेरी इस काया को, भाप बन उड़ जाना है, अब मैं हवाओं के, पंखों पे झूलूँगी,उड़ते उड़ते, नभ शिखरों को छू लूंगी,बादल का कण बन, झूम झूम उड़ना है, पवन पवन देश... [पूरी पोस्ट]
writer Yogesh Sharma

"ओस की बूँदें"

views
12
upvote
0
downvote
0
rating
0
comments
0
[27 Mar 2010 10:49 AM]

Free Vedic Astrology From Astrobix