आवाज़ की दुनिया

Punjab Screen हालांकि मैंने काफी समय से रेडियो नहीं सुना लेकिन फिर भी अभी यह कल की बात ही लगती है. बिनाका गीत माला और तामील-ए-इरशाद का एक अलग ही संसार था. फरमाइश में भाग लेने वाले श्रोतायों में एक परिवार की तरह प्यार बना हुआ था. एक दूसरे से दुआ सलाम और हाल... [पूरी पोस्ट]
writer Rector Kathuria

रेडियो की दुनिया

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[27 Mar 2010 11:12 AM]

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