आवाज़ की दुनिया
हालांकि मैंने काफी समय से रेडियो नहीं सुना लेकिन फिर भी अभी यह कल की बात ही लगती है. बिनाका गीत माला और तामील-ए-इरशाद का एक अलग ही संसार था. फरमाइश में भाग लेने वाले श्रोतायों में एक परिवार की तरह प्यार बना हुआ था. एक दूसरे से दुआ सलाम और हाल...
[पूरी पोस्ट]
Rector Kathuria
रेडियो की दुनिया
16
0
0
0
3
[27 Mar 2010 11:12 AM]



Shuffle








