जबसे जनप्रतिनिधि बने दुष्ट, उठाईगीर
जबसे जनप्रतिनिधि बने दुष्ट, उठाईगीरतबसे बढ़ती जा रही जनमानस की पीरजनमानस की पीर नीर नयनों में भरकरसहें नित्य संताप विवश हो रहते डरकरदिव्यदृष्टि दल यहां न कोई रहा अछूताजो न उठाये गुण्डों, मक्कारों का जूता...
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दिव्यदृष्टि
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[27 Mar 2010 07:40 AM]



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