छुटटी के दिन का कोरस - प्रियंबद का उपन्यास - कुमार मुकुल
छुटटी के दिन का कोरस विन्सेंट डगलस यानि विवान के 1947 की ऐतिहासिक तारीख के दोनों ओर फैले जीवन की बिखरी स्मृतियों का कोलाज है। इस कोलाज में इतिहास और यथार्थ, स्वप्न और जीवन, कल्पना और वास्तविकता एक दूसरे पर ओवरलैपिंग करते नजर आते हैं और इस सब से उपजा...
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[27 Mar 2010 07:41 AM]



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