दुआ दूं या बददुआ

कुछ कहानियाँ,कुछ नज्में आज तुम्हारी बेवफाई से वाकिफ हुए है क्या समझोगे कितने दर्द से गुज़रे हैं जब थे मेरे साथ और ख़याल था गैर का ऐसे लम्हे भी ज़िन्दगी से गुज़रे हैं तुम थे खामोश हम समझे खफा हो गुमसुम थे तो समझे कुछ जुदा हो कोशिश की खुशिया भर दूं दामन में अनजान थे तुम किसी और के... [पूरी पोस्ट]
writer Sonal Rastogi

रिश्ते

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[27 Mar 2010 05:04 AM]

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