कई खूबसूरत सुबहें समेट रखी हैं मैंने.....
आहा...एक और बेहद खूबसूरत सुबह! चेहरे पे मुस्कराहट वही बरसों पुरानी पर वजह हर रोज़ नयी! रोज़ की तरह आज भी निकली हूँ सुबह सैर करने.....पार्क की एक बैंच पर बैठती हूँ योगा करने पर....मन नहीं लगता! आज मन कहीं और अटका हुआ है.....एक क्रिकेट बॉल में ! पार्क में...
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pallavi trivedi
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[27 Mar 2010 04:25 AM]



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