मेर धर्म महान!!!

कुछ ईधर की, कुछ उधर की चींटी का धर्मपंक्तिबद्ध हो चलना.........हाथी का धर्मसमूह में चिवरना..........वानर का धर्मडाली डाली उछलना..........मानव का धर्मसर्वधर्म सद्भाव और विश्व बन्धुत्व........अरे! नहीं नहीं, रूकिये जराये सब तो पिछले जमाने की बातें हैंआज मानव का धर्मस्वधर्म में... [पूरी पोस्ट]
writer पं.डी.के.शर्मा"वत्स"

अधर्म

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[27 Mar 2010 04:09 AM]

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