भरम है या हकीकत कोई?

कुछ पन्ने मेरी दराज़ से.... जी चाहता है की तेरे दिन को अपनी शाम से मिला दूँ,जो लाली उपजे इस मिलन से उसे तेरे माथे पे सजा दूँ.घुल जाएँ दो पहर जो हैं कुछ जुदा-जुदा से,बाहों में आओ तो तुम्हे रोम-रोम में बसा दूँ.राहों में खड़ी दूरियाँ सिमट जाएँ सभी,जो मैं तेरी हथेली से हथेली मिला... [पूरी पोस्ट]
writer ●๋• नीर ஐ

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[27 Mar 2010 01:13 AM]

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