मेरा परिचय
हँस कर पूछ रहे हो परिचय कैसे दूँ निज परिचय आज ! जीवित ही शव हूँ मैं प्रियतमहूँ अवसादों का प्रिय साज़ ! लहराता है प्रति पल-पल पर पीड़ाओं का उदधि अपार !असफलता की चट्टानों से टकराता है पारावार ! सुख की रेखा कभी न जिसने देखी हो वह क्या जाने कैसा सुख है कैसा...
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Sadhana Vaid
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[26 Mar 2010 21:55 PM]



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