क्षिप्रा के तीर -3
भाग-१,भाग -२ से आगे ..........खिंची मुकंद दास मेरे जीवन -दीपक में तेल भरता रहा और मैं जिन्दगी भर जलता रहा | जलता रहा और जल-जल कर जलने की कहानी को जीवन का नाम देता रहा | जब जलने का अमर इतिहास निर्मित हो रहा था , तब मैं बुझ भी कैसे सकता था | बड़ी कठिनाईयों...
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क्षत्रिय
स्व.श्री तन सिंह जी कलम से
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[26 Mar 2010 21:17 PM]



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