नदी का किनारा
बैठी किनारे इन्तजार करती उनकासाँझ ढलने को आयीपर वे न आयेदिल डुब सा रहाक्या वो आयेगेंकरती रही इन्ताजार उनकापर वे न आये...
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धीरज शाह
मिलन
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[26 Mar 2010 19:55 PM]



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