दोस्त था मेरा सबसे प्यारा

A poetess blog उसकी छांव बड़ी अपनी थीस्नेहिल माँ की गोद के जैसी.कितनी कवितायेँ जन्मी थीजब जब उसकी छांव में बैठी.नयी कोपलें जब भी टूटीबड़े प्यार से पाली मैंनेसहलाकर , दुलराकर उनकोपन्नो बीच सजा ली मैंनेजब भी हवा चूमती उसकोशरमा कर झुक जाता आगेजब भी खेली छुआ छुआईउसके आगे... [पूरी पोस्ट]
writer ranjana
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[26 Mar 2010 16:06 PM]

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