तुम्ही निकले ...........

साहित्य योग सुख चैन छीन कर कहते हो सजा तो नहीं है जलाकर कपूर कहते हो राख तो नहीं है जाऊं भी तुम्हे छोड़ कर तो कहाँ जाऊं मंदिर, मस्जिद और भगवान भी तुम्ही निकले अधर चुम्बन देकर कहते हो बेशर्मी तो नहीं है तीर धनुष से छोड़ कहते होमृग... [पूरी पोस्ट]
writer Tej Pratap Singh
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[26 Mar 2010 15:00 PM]

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