शब्द !

दिल से कभी कभी कलम लाचार सी शब्दों को निहारती है और शब्द निष्ठुर बन जाते हैं, और कभी कभी भावनाएं शब्दों का रूप धर बहती है तब कलम पतवार बन जाती है शब्दों को पार लगाती है , और फिर भीगे हुए शब्द वस्त्र बदल कर सज संवर कर कागज़ पर उतर आते हैं और रचना बन... [पूरी पोस्ट]
writer nilesh mathur
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[26 Mar 2010 13:02 PM]

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