हो कहीं भी जूतियाँ, लेकिन पैर में ही रहनी चाहिए.
सीटियाँ प्रतीक हैं राष्ट्र की एकता का अखंडता का और साम्प्रदायिक सौहार्द का| सीटी बजाने वाले की जाति या मजहब नहीं पूछी जाती | यहाँ ना कोई छोटा होता है ना बड़ा| यहाँ आकर सारे भेद समाप्त हो जाते हैं| वर्तमान युग बेहद अनिश्चिन्तताओं से भरा है| ऐसे में सीटी...
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शेफाली पाण्डे
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[26 Mar 2010 12:53 PM]



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