खेळ
खेळ को खेळ की तरह खेलना चाहिये. खेळ इस तरह से खेलो कि निगाह जीत पर रहे, पर हार से घबराये नही, इमान को ना छोडे. जीत कर ............मुन्शी प्रेमचंद...
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[29 Nov 2009 08:30 AM]



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