प्रेम aur अंहकार
अंहकार को ध्वंस कर..पूर्ण श्रद्धा से..खुद को समर्पणकरने में ही.....चरम आनंद कीप्राप्ति की जा सकती है..!!जबकि..प्रेम अधिकार चाहता है..प्रेम जो देता है..उसके बदले मेंकुछ ना कुछ पाना चाहता है..!!...
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अनामिका की सदाये......
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[24 Dec 2009 12:09 PM]



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