मन का उद्वेग..
विचारो केज़हर भरे कांटेजब मन में उगने लगते हैं तो..विषाक्त हो जाता हैपूरा वजूद रूपी पेड..तब चन्दन की खुशबु देने वालेभाव भीज़हर में डूबने लगते है..!नहीं रोक पाताकोई भी विवेक..!सब्र का घूँट पिला देने पर भी..नहीं शांत होतामन का उद्वेग..और..बिखर जाती है..मन...
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अनामिका की सदाये......
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[12 Jan 2010 13:37 PM]



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