मन का झुकाव

अभिव्यक्तियाँ कब कहा और कैसे हम अपने मन को हार बैठते है, यह खुद हमे नही पता चलता. मालूम तब होता है जब जिसके कदमो पर हमने अपना सिर रख्खा हो और वह झटके से अपने कदम घसीट ले. उस वक्त हमारी नींद टूटती है और तब हम जा कर देखते है कि अरे हमारा सिर तो किसी के कदमो पर रख्खा हुआ... [पूरी पोस्ट]
writer अनामिका की सदाये......
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[12 Feb 2010 14:12 PM]

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