प्रेम
प्रेम एक भावनागत विषय है, भावना से ही इसका पोषण होता है, भावना से ही जीवित रहता है और भावना ही से लुप्त हो जाता है ! "तुम मेरे हो " जिस दिन इस विश्वास की जड हिल जाती है, उसी दिन प्रेम खतम हो जाता है !! .....मुन्शी प्रेम चंद...
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अनामिका की सदाये......
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[20 Mar 2010 07:44 AM]



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