विश्व रंगमंच दिवस (२७ मार्च) पर विस्साव शिम्बोर्स्का की कविता

अनुनाद दुखांतमेरे लिए दुखांत नाटक का सबसे मार्मिक हिस्साइसका छठा अंक है जब मंच के रणक्षेत्र में मुर्दे उठ खड़े होते हैं अपने बालों का टोपा संभालते हुएलबादों को ठीक करते हुएजब जानवरों के पेट में घोंपे हुए छुरे निकाले जाते हैं।और फांसी पर लटके हुए शहीदअपनी... [पूरी पोस्ट]
writer pratibha

विश्व कविता

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[26 Mar 2010 12:01 PM]

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