तेरी याद में...."मनीष"
क्यूँ है ये चाहत की याद करे तुम्हें कोई..??अपने-आप में मस्त हो जीना इन गुलाबों से सीखे कोई,घिरा रहता है हर वक़्त हज़ार काँटों से,मजाल मगर के आ जाए लब पर शिकवा कभी कोई..!!ये काफी है की तेरा एक तस्सवुर सा बना रहे मुझमें,ज़ख़्मी हुआ ये...
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manish badkas
manish
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[26 Mar 2010 09:21 AM]



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