पढ़िए अरुंधति कोः बंदूक की नली से निकलता ग्राम स्वराज

हाशिया अरुंधति राय, दंडकारण्य से लौटकरअनुवादः अभिषेक श्रीवास्तवदंतेवाड़ा को समझाने के कई तरीके हो सकते हैं। यह एक विरोधाभास है। भारत के हृदय में बसा हुआ राज्यों की सीमा पर एक शहर। यही युद्ध का केन्द्र है। आज यह सिर के बल खड़ा है। भीतर से यह पूरी तरह उघड़ा पड़ा है।... [पूरी पोस्ट]
writer Reyaz-ul-haque

शांति का मतलब है युद्ध

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[26 Mar 2010 03:31 AM]

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