सुख़न तुम्हारे, हम ना......?

GORAKHH पिछले दिनों बीकानेर अपने मरहूम शायर अज़ीज़ आज़ाद की स्मृतियों में खोया-खोया सा नजर आया। अज़ीज़ आज़ाद वैसे भी याद रहने वाले इन्सान थे क्योंकि वे हमेशा शायर और अदबकारों के अलावा आम जन के बीच भी अपनी रफ़ाकत के लिए जाने जाते रहे हैं. स्मृतियाँ अक्सर खामोश होती... [पूरी पोस्ट]
writer Gopal Singh

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[26 Mar 2010 02:10 AM]

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