patrakar
पत्रकार सपनों की दुनिया भी अजीब होती है जिंदगी के करीब होती हैहो जाये पूरी तो नसीब नहीं तो ये गरीब होती है अक्सर आता है सपना मुझे की मैं पत्रकार हूँसमाज की हर बुराई से लड़ने को तैयार हूँलोगों की चेतन जगा रहा हूँसमाज से हर बुराई को भगा...
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devendra goswami
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[10 Oct 2009 08:16 AM]



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