रेल के नन्हे सेवक
देवेश प्रताप बचपन का सफर बहुत सुहाना होता है , कोई गम नहीं कोई बोझ नहीं, न कुछ खोने का डर, न कुछ पाने कि ललक ,ऊपर वाले का भी खेल निराला होता है किसी को इतनी खुशियाँ देता है कि उनकी जिंदगी उन्ही खुशियाँ के बीच कट जाती है। और किसी को इतना दुःख कि उन दुखों...
[पूरी पोस्ट]
देवेश प्रताप
6
0
0
0
0
[21 Mar 2010 21:59 PM]



Shuffle








