बुरे से अच्छा हो तो भी मुश्किल..... बदलाव

अस्तित्व जीवन में बहु प्रतिक्षित बदलाव आया , लेकिन फिर भी पसरी हुई है गहरी उदासीनता... विचार नहीं, विचारहीनता भी नहीं...मगर कुछ तो है जिसे नहीं होना चाहिए ...। दौड़ थमी, रफ्तार पर ब्रेक लगा, चुनौती मद्धम हो गई...। चाहा हुआ पाया....संतोष होना था, नहीं हुआ...सतह पर... [पूरी पोस्ट]
writer डॉ. अमिता नीरव
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[26 Mar 2010 01:06 AM]

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