मनुस्मृति-अधर्म का प्रतिकार न करना भी अनुचित (manu smriti in hindi-Dharam & adharm)
यत्र धर्मेह्यहृधर्मेण सत्यं यत्राऽनृतेन च।हन्यते प्रेक्षमाणानां हतास्तत्र सभासदः।।हिन्दी में भावार्थ-जहां असत्य सत्य को तथा अधर्म धर्म को दबाता है उस सभा में जाने पर सभासद भी नष्ट हो जाता है। धर्मो विद्धस्त्वधर्मेण सभां यत्रोपतिष्ठते।शल्यं चास्य न...
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दीपक भारतदीप
हिन्दू-धर्म
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[26 Mar 2010 00:03 AM]



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