ख्याल

रजनीगन्धा एक ख्याल था जिसे बुना थाआँखों में असमंजस में पड़ा हैसोच रहा है धनक के पार उतरूँया ज़मीन पर आशियाना बनाऊँमैंने भी पूछा नहीं मंज़िल कहाँ,क्या खोज रहा था वह राह जिसमेंमीठे सपनों का झरना होसेतु क्षितिज से मिलता हो,कगार पर बालू में धंसी वो नाव होऔर पानी की लम्बी... [पूरी पोस्ट]
writer रजनी भार्गव
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[25 Mar 2010 23:34 PM]

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