क्षिप्रा के तीर -2
भाग- १ से आगे ....जो मुझे बुला रहा है - घोड़े पर चढ़ा हुआ , हाथ में भाला लिए | तो सुनें , उसके पास जाकर , वह क्या कहना चाहता है ?वि.स. 1695 की श्रावण शुक्ला चतुर्दशी को मुझे एक माता मिली और मैंने उस जननी को कभी लज्जित नहीं होने दिया | ममता के क्षण आये ,...
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क्षत्रिय
स्व.श्री तन सिंह जी कलम से
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[25 Mar 2010 23:00 PM]



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