"सब्जी-मण्डी" (डॉ.रूपचन्द्र शास्त्री "मयंक")
देखो-देखो सब्जी-मण्डी, बिकते आलू,बैंगन,भिण्डी।कच्चे केले, पक्के केले,मटर, टमाटर के हैं ठेले।गोभी,पालक,मिर्च हरी है,धनिये से टोकरी भरी है।लौकी, तोरी और परबल हैं,पीले-पीले सीताफल हैं।अचरज में है जनता सारी,सब्जी-मण्डी कितनी प्यारी।(चित्र गूगल सर्च से साभार)...
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डॉ. रूपचन्द्र शास्त्री मयंक
बालगीत
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[25 Mar 2010 22:15 PM]



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