पृथ्वी पर रहने का किराया दो
इस बार कुछ देर हो गई । नवरात्रि पर अपने ब्लोग शरद कोकास पर विदेशी कवयित्रियों की कविता लगाने में व्यस्त रहा । इसके लिये क्षमा चाहता हूँ । खैर ..देर से ही सही प्रस्तुत है " मस्तिष्क की सत्ता " लेखमाला में इस बार की यह कड़ी हमारी पृथ्वी पर...
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शरद कोकास
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[25 Mar 2010 19:20 PM]



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