कसक दिल की

काव्य तरंग सजदे कितने कियेचोखट पर तेरीपर दर्द दिल काहुआ न कमखुशियों की सहरनहीं शायदकिस्मत में अपनीग़म की अँधेरी रात में हीनिकलेगा ये दम******************जिनकी आरज़ू मेंमिटाया थाखुद को जहां सेन जलाइक दिया भीउनसे सजदे मेंयार केये मतलब कीदुनियाघड़ी भर मेंबदलती हैनासमझ... [पूरी पोस्ट]
writer रानीविशाल

कविता

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[25 Mar 2010 19:48 PM]

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