नोटों की माला का अर्थात
बहनजी काँटों भरा सफ़र तय करके आलीशान सिंहासन तक पहुँची हैं, अतः फूलों की माला पहनकर वे काँटों का अपमान नहीं करना चाहतीं।वे जिस समाज का नेतृत्व करती हैं दुनिया आज भी उसे काँटा ही मानती है।दुनिया उस काँटे से अपने पाँव का चुभा काँटा निकालकर फिर उसे बाहर फेंक...
[पूरी पोस्ट]
ओम द्विवेदी
14
1
0
1
2
[25 Mar 2010 14:29 PM]



Shuffle








