दर्दे --जिन्दगी

JHAROKHA दवा ही बन ग़यी है जिन्दगी मेरी, दुआ कीजिये वो जहर न बने। लहू जो दौड़ रहा जिस्म में, दुआ कीजिये बेरंग न बने। पिये जा रही हूं गमों के चिलम, दुआ कीजिये वो कहर न बन॥ नहीं देख सकता जो औरों का चैन, दुआ कीजिये वो नज़र न बने। समझता नहीं जो दर्द जिन्दगी का, दुआ... [पूरी पोस्ट]
writer JHAROKHA
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[25 Mar 2010 14:25 PM]

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