लाडली नगर बधू के नखरे हजार उठाये कौन १
शाशिभूषणतामड़े उवाच;दोस्तों,वो चाहे अच्छाई हो या फिर बुराई !पर यदि वो, चाहे या अनचाहे ,हमारे शख्शियत से जुड़ गयी है तो एक वक्त ऐसा भी आता है जब वो अच्छाई या बुराई हमारे जी का जंजाल भी साबित हो जाती है क्यों कि लोगबाग उसी के आदि बन चुके होते है और जब उस...
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S B Tamare
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[25 Mar 2010 13:08 PM]



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