अपने दुखों को सार्वजनिक करने से बचते हुए...
1]वे कहीं भी और कितना भी रो सकते हैंचाहे सड़क पे जोर-जोर सेया फिर कविता में चुप-चुपकवि होने सेउन्हें मिली हुई है इतनी छूटऔर ऐसा मान लिया गया है कि रोनाउनके काम का हिस्सा हैऔर इसलिए उस पर ज्यादा कान देने की जरूरत नहीं हैहाँ...कभी-कभी ताली बजाई जा सकती...
[पूरी पोस्ट]
ओम आर्य
33
3
0
3
19
[25 Mar 2010 12:38 PM]



Shuffle








