तलाश

bhawnayen मिट गई है जो अपने हाथों से, वो लकीरे ढूढ़ंते रहे ।तराश सके हमारे तकदीर को, ऐसा कारीगर ढूढ़ंते रहे ॥दूर होकर भी भुला ना पाया है, ये दिल उनको,फ़ासलों के दरमियाँ हम नज़दिकीयाँ ढूढ़ंते रहे ॥तेरे होठों पर एक मुस्कुराहट की ख्वाईश लिये,तमाम उम्र, काटों के चमन में... [पूरी पोस्ट]
writer dipayan
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[25 Mar 2010 12:21 PM]

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